आचार्य नीति
पंडित एवं आचार्य मंडल — हमारी नीति एवं धारणाएँ
हमारे साथ जुड़े प्रत्येक पंडित, आचार्य और ज्योतिषाचार्य शास्त्रज्ञ एवं कर्मनिष्ठ साधक हैं।
यह गौरव किसी उपाधि या पद से नहीं मिलता, बल्कि कठोर शास्त्रीय अध्ययन, साधना और चारित्रिक अनुशासन से अर्जित होता है।
केवल वही व्यक्ति जो इस कठिन साधना-पथ से गुजरता है, वह “पंडित” अथवा “आचार्य” कहलाने का अधिकारी है। हमारे मंडल का प्रत्येक सदस्य धर्ममार्ग पर संकल्पित साधक है, जो वेदसम्मत विधियों का पालन करते हैं।

🙏 हमारी नीति एवं धारणाएँ
1. धर्म व्यवसाय नहीं है
हमसे जुड़े पंडित और आचार्यजन धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, यज्ञ एवं संस्कार करते एवं कराते हैं —
लेकिन वे किसी प्रकार के व्यापारी या ठेकेदार नहीं हैं।
इसलिए जो लोग धर्म या देवताओं को केवल व्यापार का विषय मानकर पूजन अथवा अनुष्ठान करवाना चाहते हैं,
उनसे हमारा कोई संबंध नहीं है।
हम स्पष्ट करते हैं कि —
धर्म कभी भी सौदेबाज़ी या ठेके का विषय नहीं है, धर्म तो केवल श्रद्धा और आत्मा की आहुतियों से जीवित रहता है।
2. केवल श्रद्धालुओं के लिए
हमारे पंडित एवं आचार्यगण केवल उन श्रद्धालुओं के निवेदन को ही स्वीकार करते हैं
जो वास्तव में धार्मिक, सात्विक और आस्था से जुड़े हुए हों।
वे केवल
- श्रद्धालु के घर,
- व्यक्तिगत आस्था स्थल (जैसे गृह-मंदिर),
- या किसी सामूहिक धार्मिक स्थल पर ही
पूजा-पाठ एवं संस्कार सम्पन्न करते हैं।
किसी भी व्यापारिक आयोजन, मंचन या दिखावे हेतु हम कोई अनुष्ठान नहीं करते।
3. ठेके पर अनुष्ठान नहीं
हम एवं हमसे जुड़े सभी पंडित, आचार्य और ज्योतिषाचार्य
किसी भी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान “ठेके पर” सम्पन्न नहीं करते।
हमारा स्पष्ट मत है कि —
- जब धर्म ठेका प्रणाली में बदल जाता है, तब उसकी पवित्रता नष्ट हो जाती है।
- देवता कभी भी व्यवसाय की वस्तु नहीं हो सकते।
- अनुष्ठान केवल श्रद्धा और ईश्वर के प्रति समर्पण का माध्यम है,
न कि लाभ-हानि की गणना का विषय। - प्रत्येक अनुष्ठान केवल श्रद्धा एवं समर्पण का माध्यम होना चाहिए।
🌺 श्रद्धालु के लिए हमारा दृष्टिकोण
- किसी भी श्रद्धालु का धार्मिक निवेदन हमारे लिए सार्थक और हमेशा शिरोधार्य है।
- जब कोई व्यक्ति श्रद्धा से अनुष्ठान का आग्रह करता है, तो वास्तव में वह ईश्वर की इच्छा का ही निमित्त होता है, इसलिए हम उसे ईश्वर की प्रेरणा मानते हैं।
- हम प्रत्येक अनुष्ठान को नियम, शुद्धता और वेदसम्मत विधि के साथ सम्पन्न करते हैं।
- हमारे पंडित और आचार्यजन ऐसे प्रत्येक श्रद्धालु के आग्रह को
सेवा और समर्पण भाव से स्वीकार करते हैं।
हमारा उद्देश्य
हमारे पंडित एवं आचार्य केवल यही चाहते हैं कि —
- हर घर में धार्मिक शांति और मंगल स्थापित हो।
- हर अनुष्ठान में शुद्ध वेदसम्मत विधि का पालन हो।
- धर्म का प्रचार किसी व्यापार, दिखावे या ठेकेदारी के रूप में नहीं,
बल्कि श्रद्धा और समर्पण के मार्ग पर हो।
सार 🌿
हम और हमसे जुड़े सभी पंडित, आचार्य व ज्योतिषाचार्य
केवल और केवल धार्मिक व्यक्तियों की आस्था को ही
अपना धर्म और अपना कर्तव्य मानते हैं।
धर्म हमारे लिए कोई वस्तु नहीं,
बल्कि यह हमारी जीवनशैली और आत्मा का संकल्प है।
👉 अतः, यदि आप श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा के भाव से
धार्मिक अनुष्ठान करवाना चाहते हैं,
तो आपका स्वागत है।
🙏 आपका निवेदन हमारे लिए शिरोधार्य है।
