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राम स्तुति – नमामि भक्त वत्सलं

by Vaidik Marg · August 24, 2025

राम स्तुति – नमामि भक्त वत्सलं

नमामि भक्त वत्सलं। कृपालु शील कोमलं ॥
भजामि ते पदांबुजं। अकामिनां स्वधामदं ॥

निकाम श्याम सुंदरं। भवाम्बुनाथ मंदरं ॥
प्रफुल्ल कंज लोचनं। मदादि दोष मोचनं ॥

प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं ॥
निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं ॥

दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं ॥
मुनींद्र संत रंजनं। सुरारि वृंद भंजनं ॥

मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं ॥
विशुद्ध बोध विग्रहं। समस्त दूषणापहं ॥

नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं ॥
भजे सशक्ति सानुजं। शची पतिं प्रियानुजं ॥

त्वदंघ्रि मूल ये नराः। भजंति हीन मत्सरा ॥
पतंति नो भवार्णवे। वितर्क वीचि संकुले ॥

विविक्त वासिनः सदा। भजंति मुक्तये मुदा ॥
निरस्य इंद्रियादिकं। प्रयांति ते गतिं स्वकं ॥

तमेकमभ्दुतं प्रभुं। निरीहमीश्वरं विभुं ॥
जगद्गुरुं च शाश्वतं। तुरीयमेव केवलं ॥

भजामि भाव वल्लभं। कुयोगिनां सुदुर्लभं ॥
स्वभक्त कल्प पादपं। समं सुसेव्यमन्वहं ॥

अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं ॥
प्रसीद मे नमामि ते। पदाब्ज भक्ति देहि मे ॥

पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं ॥
व्रजंति नात्र संशयं। त्वदीय भक्ति संयुता ॥

बार बार बर मागउं हरषि देहु श्रीरंग ।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग ॥

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