दुर्गा दुर्गति नाशिनी, काली काल विनाशिनी…
यह भजन भक्त की पुकार है, जिसमें वह अपने पाप, दुख, मोह और कपट को स्वीकार करते हुए माँ दुर्गा की शरणागत हो जाता है। माँ को “भवसागर तारिणी” और “विपत्ति निवारिणी” कहकर अपनी रक्षा और उद्धार की प्रार्थना करता है।

भजन
दुर्गा दुर्गति नाशिनी
काली काल विनाशिनी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
सत सत सूर्य प्रकाशिनी
मधुमति विंध्य विलाशिनी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
केयो नहीं अपने जगत में मैया
छोड़ि अहां के भवानी
छोड़ि अहां के भवानी
अतिशय मूढ़ कुपुत्र अहां के
हम जपतप नहीं जानी
हम जपतप नहीं जानी
हे भव सागर तारिनी
दुर्गति विपति निवारिणी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
रंग रहस में दिवस गमावल
मैया हम बड़ पापी
मैया हम बड़ पापी
कानय लेल अहां लग एलौं
कपटी धूर्त विलापी
कपटी धूर्त विलापी
माया मोह निवारणी
शूल खडग कर धारिणी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
ममता मयी करूणामयी मैया
हमरा आब उबारू
हमरा आब उबारू
बीच भंवर डूबी रहल छी
अंबे पार उतारू
अंबे पार उतारू
पावन पर्वत वासिनी
त्रिपुरा शक्ति सुहासिनी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
दुर्गा दुर्गति नाशिनी
काली काल विनाशिनी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
सत सत सूर्य प्रकाशिनी
मधुमति विंध्य विलाशिनी
मैया मैया अहीं के शरण हम एलौं
मैया अहीं के शरण हम एलौं
संदेश
इस भजन में भक्त माँ से कहता है कि—
- संसार में आपके अतिरिक्त कोई आश्रय नहीं है।
- मैं पापी हूँ, कपटी हूँ, परंतु आपके बिना मुझे कोई तारने वाला नहीं।
- हे माँ! आप ही भवसागर से पार लगाने वाली हैं, आप ही विपत्तियों को हरने वाली हैं।
- कृपामयी माँ! अभी मुझे बचा लीजिए, मेरे जीवन को पवित्र बना दीजिए।
यह भजन केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि सच्चे शरणागत भाव का अद्भुत उदाहरण है। जब कोई भक्त अपने अहंकार, पाप और दोषों को स्वीकार कर पूर्ण समर्पण करता है, तभी ईश्वर/माँ की कृपा बरसती है।
