श्रीरामस्तवराजः
श्रीरामस्तवराजः श्रीरामचन्द्रं नयनाभिरामं राजीवनेत्रं जनकात्मजेशम् ।अनन्तलावण्यगुणैकधाम स्वकीयचित्ते नितरां स्मरामि ॥ १॥ वातात्मजाऽऽराधितपादपद्मं नित्यं प्रसन्नं बुधवृन्दवन्द्यम् ।अशेषदेवैः समुपासनीयं श्रीरामचन्द्रं हृदि भावयामि...

श्रीरामस्तवराजः श्रीरामचन्द्रं नयनाभिरामं राजीवनेत्रं जनकात्मजेशम् ।अनन्तलावण्यगुणैकधाम स्वकीयचित्ते नितरां स्मरामि ॥ १॥ वातात्मजाऽऽराधितपादपद्मं नित्यं प्रसन्नं बुधवृन्दवन्द्यम् ।अशेषदेवैः समुपासनीयं श्रीरामचन्द्रं हृदि भावयामि...
श्रीरामप्रातःस्मरणम् श्रीरामपञ्चकम् प्रातः स्मरामि रघुनाथमुखारविन्दंमन्दस्मितं मधुरभाषि विशालभालम् ।कर्णावलम्बिचलकुण्डलशोभिगण्डंकर्णान्तदीर्घनयनं नयनाभिरामम् ॥ १॥ प्रातर्भजामि रघुनाथकरारविन्दंरक्षोगणाय भयदं वरदं निजेभ्यः ।यद्राजसंसदि विभज्य महेशचापंसीताकरग्रहणमङ्गलमाप सद्यः...
समुद्र का रहस्य और नल–नील की शक्ति राम की सेना समुद्र तट पर खड़ी थी।तीन दिन की विनती और क्रोध...
जब राम ने समुद्र से संवाद किया कल्पना कीजिए…लंका पहुँचने से पहले राम की सेना समुद्र तट पर आकर ठहर...
समुद्र काँपा, पर्वत डोले—लंका विजय की ओर अग्रसर रामसेना रामायण का यह प्रसंग केवल युद्ध–यात्रा नहीं, बल्कि धर्म और साहस...
सोने की लंका : वैभव की चकाचौंध में अधर्म का अंधकार कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना। चउहट्ट हट्ट...
सुन्दरकाण्ड श्लोक शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदंब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् ।रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिंवन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम् ॥ १ ॥ नान्या स्पृहा...
श्रीराम ताण्डव स्तोत्रम् जटाकटाहयुक्तमुण्डप्रान्तविस्तृतं हरेःअपाङ्गक्रुद्धदर्शनोपहार चूर्णकुन्तलः ।प्रचण्डवेगकारणेन पिञ्जलः प्रतिग्रहःस क्रुद्धताण्डवस्वरूपधृग्विराजते हरिः ॥ १॥ अथेह व्यूहपार्ष्णिप्राग्वरूथिनी निषङ्गिनःतथाञ्जनेयऋक्षभूपसौरबालिनन्दनाः ।प्रचण्डदानवानलं समुद्रतुल्यनाशकाःनमोऽस्तुते सुरारिचक्रभक्षकाय मृत्यवे...
रामाष्टकम् भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् ।स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम् ॥ १॥ जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकम् ।स्वभक्तभीतिभङ्जनं भजेह राममद्वयम् ॥ २॥ निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम् ।समं...
जटायू का मोक्ष : करुणा और भक्तवत्सल राम का अनुपम प्रसंग भारतीय महाकाव्य रामचरितमानस केवल कथा नहीं, बल्कि धर्म, नीति...
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